भारतीय नौसेना का ‘सी विजल’ युद्धाभ्यास शुरू

कोचि: देश के लगभग ७,५१६ किलोमीटर लंबे समुद्री तट के क्षेत्र में भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने ‘सी विजल २०१९’ यह भव्य युद्धाभ्यास की शुरूआत की है| भारतीय नौसेना का यह आज तक का सबसे बडा युद्धाभ्यास होने का दावा हो रहा है| इस युद्धाभ्यास के माध्यम से देश की समुद्री क्षेत्र के लिए बने खतरों का सामना करने की तैयारी की जांच की जा रही है, यह जानकारी नौसेना ने दी है|

भारतीय नौसेना, सी विजल, युद्धाभ्यास, शुरू, कोचि, आतंकी हमलेभारतीय नौसेना और तटरक्ष बल के इस युद्धाभ्यास में देश के समुद्री तट से जुडे १३ राज्य एवं केंद्रीय शासित प्रदेश का समावेश किया गया है और यहां की संबंधित यंत्रणा भी इस युद्धाभ्यास में शामिल की गई है| नौसेना ने इस संबंधी जानकारी उजागर की है| मुंबई पर हुए आतंकी हमले को दस वर्ष हो चुके है और उसके बाद भारत के समुद्री तट की सुरक्षा के लिए कुछ अहम निर्णय किया गया था| इस पृष्ठभुमि पर समुद्री मार्ग से होने वाले हमलें और खतरों का सामना करने की तैयारी की जांच इस युद्धाभ्यास से की जाएगी| एक ही साथ देश की समुद्री सीमा की सुरक्षा का इस तरह से मुआयना करने के लिए हो रहा यह देश का पहला ही युद्धाभ्यास होने की बात कही जा रही है|

इस युद्धाभ्यास की पृष्ठभुमि पर भारत और चीन के बीच एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में वर्चस्व बनाने के लिए शीत युद्ध शुरू होने का दावा भारतीय सामरिक विश्‍लेषक कर रहे है| भारत के कमोडर (निवृत्त) अनिल जय सिंग इन्होंने चीन की नौसेना की हिंद महासागर क्षेत्र में बढती उपस्थिति और चीन की महत्वाकांक्षा का मुद्दा उपस्थित करके सिर्फ भारतीय उपमहाद्विप के ही नही, बल्कि पश्‍चिमी देशों के माध्यमों का भी ध्यान आकर्षित किया| एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में वर्चस्व स्थापित करने के लिए चीन की महत्वाकांक्षा है और उसी दृष्टी से चीन ने अपनी नौसेना की रचना की है, इस ओर भी कमोडर अनिल जय सिंग इन्होंने ध्यान आकर्षित किया| इस वजह से अगले समय में इस सागरी क्षेत्र में भारत और चीन के हितसंबंधों का टकराव हुए बिना नही रहेगा, यह दावा सिंग इन्होंने किया है|

भारतीय नौसेना, सी विजल, युद्धाभ्यास, शुरू, कोचि, आतंकी हमलेचीन की नौसेना से भारत को सीधा खतरा नही है| लेकीन फिर भी चीन की नौसेना की हिंद महासागर क्षेत्र में बढती उपस्थिति भारत के लिए चुनौती ही है| अपने व्यापारी यातायात की सुरक्षा और समुद्री डकैती के विरोधी कार्रवाई का कारण आगे करके चीन के युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में भ्रमण करते है| इसके पीछे चीन के हितसंबंध भी है| लेकिन, इस के पीछे भारत पर हावी होने की चीन की महत्वाकांक्षा नजरअंदाज की नही जा सकती, यह संकेत कमोडर अनिल सिंग इन्होंने दिए है| साथ ही चीन ने अपनी नौसेना का पिछले कुछ वर्षों में तेजीसे विस्तार किया था, इस ओर भी उन्होंने ध्यान आकर्षित किया है|

पिछले २० वर्षों में चीन ने अपनी नौसेना में १५० युद्धपोत एवं ५० पनडुब्बीयां शामिल की है, इसका एहसास कमोडर सिंग इन्होंने कराया| कुछ दिन पहले राजधानी नई दिल्ली में हुए ‘रायसेना डायलॉग’ में बोलते समय भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लान्बा इन्होंने चीन की नौसेना का सामर्थ्य तेजीसे बढ रहा है यह कहकर, पिछले २०० वर्षों मेें अन्य किसी भी देश ने नौसेना के सामर्थ्य में इतनी तादात में बढोतरी नही हुई थी, यह चेतावनी भी उन्होंने दी थी| इस चर्चा सत्रा में शामिल हुए अमरिका, ऑस्ट्रेलिया एवं जापान के वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों ने भी चीन के बढते सामर्थ्य की वजह से बने असंतुलन पर चिंता व्यक्त की थी|

कमोडर सिंग भी चीन के बढते सामर्थ्य की ओर ध्यान आकर्षित कर रहे है| उसी समय कमोडर सिंग इन्होंने भारत भी चीन को प्रत्युत्तर देने में सक्षम नौसेना है, इस बात पर भी ध्यान दिया| भारतीय नौसेना के सामर्थ्य में भी बढोतरी हुई है और विश्‍व की प्रमुख नौसेनाओं में भारतीय नौसेना का भी समावेश है, यह कहकर कमोडर सिंग इन्होंने आने वाले समय में भारत और चीन के बीच में एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में शीत युद्ध जारी रहेगा, यह चेतावनी दी है|