भारत चीन के लोहा उत्पादन पर ‘कर’ बढ़ाएगा

नई दिल्ली – अमरिका के साथ व्यापारी युद्ध भड़कते समय चीन से आयात किए जाने वाले लोहे पर अतिरिक्त कर जारी करके भारत ने भी चीन को झटका दिया है। भारत में अग्रगण्य लोहा उत्पादक कंपनियों ने चीन में आयात होने वाले सस्ते पोलाद के संदर्भ में ‘डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज’ डीजीटीआर को शिकायत की थी। उसके बाद स्थानीय उत्पादकों का हित रखने के लिए डीजीटीआर ने चीन से आयात होने वाले कई पोलाद उत्पादनों पर डंपिंग ड्यूटी बढ़ाने की सिफारिश वित्त मंत्रालय को करने की बात कही जा रही है। वित्त मंत्रालय जल्द ही इस पर निर्णय लेने की संभावना है।

फिलहाल अमरिका और चीन में व्यापार युद्ध भड़का हुआ है। ४ महीने पहले अमरिका ने चीन से आयात किए जाने वाले पोलाद पर जबरदस्त कर जारी करना शुरू किया था। इस से चीन की वित्त व्यवस्था पर नकारात्मक परिणाम दिखाई दे रहे हैं। चीन और अमरिका की इस व्यापार युद्ध का फायदा भारत को मिलेगा, ऐसी गहरी आशंका व्यक्त की जा रही थी। भारत एवं चीन के व्यापार में भारत को बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसकी वजह से इस व्यापार युद्ध के बाद चीन में भारत के निर्यात बढ़ने की आशंका कई तज्ञ व्यक्तियों ने व्यक्त की है। वैसा होते हुए भी चीन निर्यात कर रहे सस्ते उत्पादनों की वजह से भारत के विभिन्न उद्योगों को झटका लग रहा है।

स्थानीय उद्योग का यह नुकसान टाला जाए एवं उन्हें रक्षा मिले इसके लिए भारत सरकार से विविध उत्पादनों की आयात पर एंटी डंपिंग ड्यूटी जारी होती है। तथा इस कर का समय समय पर पुनर्विचार होता है।

चीन से निर्यात किए जाने वाले स्टील अर्थात पोलाद उत्पादन पर इससे पहले भी एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई जा रही है। पर इस कर की मात्रा बढ़ाने के लिए डीजीटीआर ने सिफारिश भी की है। भवन निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण के लिए उपयोग में आने वाले लोहे की सलिया और धातु मिश्रित पोलाद पर भी ४४.८९ डॉलर्स एवं १८५.१ डॉलर्स प्रति टन इतनी एंटी डंपिंग ड्यूटी जारी की जाए ऐसा डीजीटीआर ने वित्त मंत्रालय को किये सिफारिश में कहा है।

जेएसडब्ल्यू स्टील लिमिटेड, सनफ्लैंग आयर्न एंड स्टील कंपनी, उषा मार्टिन, गेरडाव स्टील इंडिया, वर्धमान स्पेशल स्टील और जैसवाल नेको इंडस्ट्रीज जैसे अग्रगण्य कंपनियों ने चीन के सस्ते पोलाद की वजह से नुकसान सहना पड़ रहा है, ऐसी शिकायत डीजीटीआर के पास की थी। सस्ते दर से आयात पोलाद मिलने की वजह से स्थानीय उत्पादनों की मांग कम हुई है। इसका बहुत बड़ा झटका देसी उद्योग को लग रहा है, ऐसी बात शिकायत में कही है। उसके बाद संपूर्ण जांच करके डीजीटीआर ने यह सिफारिश वित्त मंत्रालय को की थी।

भवन निर्माण एवं रास्तों के लिए लगने वाली सलिया एवं मिश्रित पोलाद की आयात बड़ी तादाद में बढ़ रही है। सन २०१३ से १४ के वित्तीय वर्ष में १३२,९३३ टन रही यह आयात २५६००० टन पर पहुंची है। इसमें सर्वाधिक स्टील आयात चीन से हो रही है।

सन २०१३-१४ के वित्तीय वर्ष में चीन से होने वाली आयात ५६६९० टन थी। यह आयात बढ़ाकर १८०९५९ टन पर पहुंची है। कुल मिलाकर इस आयात में आधे से अधिक आयात यह चीन से हो रही है।