‘जर्मनी तुर्की के ‘इन्सिर्लिक’ अड्डे पर तैनात सेना वापस बुलायेगा’ : चॅन्सेलर अँजेला मर्केल की चेतावनी

बर्लिन, दि. १६: तुर्की ने जर्मन संसद के सदस्यों को, ‘इन्सिर्लिक’ सेना के अड्डे की भेट करने से रोकने के बाद दोनो देशों के बीच के संबंध विस्फोटक बन चुके हैं| जर्मनी की चॅन्सेलर अँजेला मर्केल ने, जर्मनी तुर्की में तैनात सेना को वापस बुलायेगा, ऐसी चेतावनी देकर, अन्य खाड़ी देश में सेना तैनात करेंगे, ऐसी फ़टकार लगायी है| तुर्की के विदेशविभाग ने, जर्मन सांसदों की भेंट इस समय उचित नहीं है, ऐसा कारण देते हुए उन्हें प्रवेश देने से इन्कार किया, ऐसा सामने आया है|

जर्मनी की सेना देश की संसद के नियंत्रण में है| इसी कारण संसद सदस्यों को जर्मन सेना से मिलने का पूरा अधिकार है| लेकिन तुर्की ने किया यह फैसला बहुत ही दुर्भागी है| हमने हमारी भूमिका कई माध्यमों से स्पष्ट की है| इसके आगे भी हम तुर्की के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे| लेकिन इस दौरान, तुर्की के लिए समांतर विकल्प ढूँढ़ निकालकर मुहिम की कार्यवाही की जायेगी| इन्सिर्लिक अड्डे के लिए विकल्प ढूँढ़ा जायेगा और उनमे जॉर्डन जैसे देश शामिल हैं’, इन बयानों में चॅन्सेलर मर्केल ने तुर्की से सैन्य वापस लेने की चेतावनी दी|

तुर्की के ‘इन्सिर्लिक’ इस हवाई अड्डे पर जर्मनी के २७० सैनिक और लडाकू और गश्ती विमान तैनात है| सीरिया की ‘आयएस’विरोधी मुहीम के लिए यह तैनाती की गयी है| तुर्की ने जर्मन सांसदों को ‘इन्सिर्लिक’ में आने की इजाज़त देने से इन्कार कर देने की यह दूसरी घटना है| पिछले साल ‘आर्मेनियन वंशसंहार कानून’ के मुद्दे को लेकर तुर्की ने जर्मन सांसदों को प्रवेश नहीं दिया था| इस नये इन्कार के पीछे, तुर्की के विद्रोह में शामिल सैनिकों को आश्रय देने का जर्मनी का फैसला, यह कारण है, ऐसे कहा जाता है|

पिछले कई महिनों में जर्मनी और तुर्की के बीच कई बार विवाद हुए होकर, दोनो देशों ने आक्रामक भूमिका अपनाने से संबंध बिगड़ गये थे| तुर्की ने जर्मन पत्रकार की की गिरफ्तारी, उनसे मिलने देने के लिए किया इन्कार और निर्वासितों के मुद्दे को लेकर दी धमकी इन मसलों पर जर्मनी के राजनैतिक स्तर पर से तीव्र प्रतिक्रिया आयी थी| उसके बाद, तुर्की में एर्दोगन की सत्ता प्रभावशाली करने के लिए आयोजित जनमतसंग्रह में हुए प्रचार से दोनो देशों के बीच संबंध बहुत बिगड़ गये थे| जर्मनी ने खुली चेतावनी दी है कि तुर्की ने यदि मृत्युदण्ड के मुद्दे पर जनमतसंग्रह लिया, तो जर्मनी में रहनेवाले तुर्की नागरिकों को उसमें मतदान करने नहीं दिया जायेगा|

तुर्की ने, पिछले साल हुए विद्रोह के बाद जर्मनी में आश्रय लिये सैनिकों और अधिकारियों को जर्मनी तुर्की सरकार के पास सौंप दें, ऐसी माँग की है| जर्मनी ने इस माँग को नकारते हुए कुछ सैनिकों को आश्रय दिया, ऐसी जानकारी सामने आयी है| इसी कारण तुर्की ने आक्रामक भूमिका अपनाते हुए, जर्मन सांसदों को इजाज़त न दी होकर, आगे चलकर अधिक तीव्र गूँजें उठने की संभावना है| जर्मन नेतृत्व ने तुर्की की आक्रामकता का क़रारा जवाब देते हुए, सीधे सेना के अड्डे का स्थान ही बदलने की चेतावनी दी होकर, किसी भी हालत में ‘ब्लॅकमेल’ का शिकार नहीं होंगे, ऐसी कड़ी भूमिका अपनायी है|