विदेश मंत्री सुषमा स्वराज उजबेकिस्तान की यात्रा पर

ताश्कंद: विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इनकी दो दिन की उजबेकिस्तान की यात्रा शुरू हुई है| भारत और मध्य एशियाई देशों की पहली परिषद उजबेकिस्तान के समरकंद में आयोजित की गई है| विदेश मंत्री स्वराज इस परिषद को संबोधित करेगी| विदेश मंत्री स्वराज और मध्य एशियाई देशों की इस चर्चा में अफगानिस्तान के विदेश मंत्री भी शामिल हो रहे है| इस वजह से इस दौरान अफगानिस्तान में शुरू गतिविधियों पर भी अहम चर्चा होने की उम्मीद है|

विदेश मंत्री, सुषमा स्वराज, उजबेकिस्तान, यात्रा, पर, ताश्कंद, अफगानिस्तानउजबेकिस्तान, ताजिकस्तान, करगिजस्तान, तुर्कमेनिस्तान और कजाकिस्तान इन मध्य एशियाई देशों के विदेश मंत्री इस परिषद में शामिल हो रहे है| भारत के साथ मध्य एशियाई देशों की इस चर्चा को काफी बडा व्यापारी और सामरिक महत्व है| कुछ दिनों पहले ही ईरान का छाबहार बंदरगाह भारत ने पूरी तरहे से कार्यान्वित करने की खबरें प्रसिद्ध हुई थी| इस बंदरगाह का इस्तेमाल करके भारत ईरान के रास्ते अफगानिस्तान में सामान पहुंचा रहा है| इस वजह से भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापार होना सुनिश्‍चित हुआ है|

लेकिन यह व्यापार और माल ढुंलाई केवल अफगानिस्तान तक सीमित न करके, उसके आगे पहुंचेगी| इस मार्ग से भारत मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार करेगा| इसके लिए भारत ने काफी पहले से कोशिश शुरू की थी| पाकिस्तान ने अपने भौगोलिक स्थान का लाभ उठाकर भारत का अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार रोक रखा था| लेकिन इसके आगे पाकिस्तान को बाजू में रखकर भारत ने ईरान के छाबहार बंदरगाह के रास्ते अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों के साथ व्यापार बढाने का उद्दीष्ट सामने रखा है|

इस पृष्ठभुमि पर समरकंद में आयोजित भारत और मध्य एशियाई देशों की परिषद काफी अहम साबित होती है| इस परिषद में कुछ अहम घोषणा होगी, यह संकेत प्राप्त हो रहे है| साथ ही इस परिषद के लिए अफगानिस्तान के विदेश मंत्री को खास तौर पर आमंत्रित किया गया था| यह बात भी भारत और मध्य एशियाई देशों की वरीयता दिखा रही है|

मध्य एशियाई देश ईंधन से भरे है और भारत की ईंधन की मांग बडी मात्रा में बढ रही है| उसी समय भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी अस्थिरता ध्यान में रखकर ईंधन की खरीद बढाने के लिए उत्सुक है| वही यह देश भी भारत की ओर ईंधन का बडा खरीदार के तौर पर उम्मीद से देख रहे है| भारत ने इस सहयोग की नींव काफी पहले ही बनाई थी, यह भी स्पष्ट हो रहा है|

२०१५ में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन्होंने मध्य एशियाई के चार देशों की यात्रा की थी| वही विदेश मंत्री सुषमा स्वराज छह महीनों में दुसरी बार उजबेकिस्तान की यात्रा कर रही है|

मध्य एशियाई देशों के साथ भारत का व्यापारी सहयोग केवल ईंधन क्षेत्र तक सीमित नही है, बल्कि अन्य संबंधों के दृष्टी से भी अहम साबित हो सकता है| भारत इन मध्य एशियाई देशों की ओर बतौर बाजार देख रहा है और भारतीय उत्पादों को इस क्षेत्र से बडी मांग प्राप्त हो सकती है| इसी लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ बन रहे भारत के सहयोग की ओर विश्‍लेषकों का ध्यान लगा है|