तुर्की को यूरोपीय महासंघ में प्रवेश देने से यूरोपियन संसद ने किया इन्कार

तृतीय महायुद्ध, परमाणु सज्ज, रशिया, ब्रिटन, प्रत्युत्तरअंकारा/ब्रुसेल्स – आपने क्या गुनाह किया है, इसकी जानकारी ना होते हुए भी १७ महीने जेल में रहना यह वर्तमान के तुर्की की असलियत है, इन शब्दों में प्रहार करके यूरोपीय संसद के डच सदस्य कैटि पिरी इन्होंने तुर्की को महासंघ की सदस्यता ना देने के प्रस्ताव का समर्थन किया| बुधवार के दिन स्ट्रासबर्ग में यूरोपियन संसद की बैठक में तुर्की को महासंघ में प्रवेश देने से जुडी बातचीत रोकने का प्रस्ताव अधिकांश मतों से मंजूर किया गया| इस प्रस्ताव की वजह से तुर्की की महासंघ का सदस्य होने की आशा फिर एक बार पूरी नही हो सकी है|

पिछले कई वर्षों से तुर्की महासंघ की सदस्यता पाने के लिए लगातार कोशिश करता दिखाई दिया है| वर्ष २००५ से तुर्की एवं महासंघ के बीच सदस्यता के मुद्दे पर बातचीत शुरू है| लेकिन, पूर्व प्रधानमंत्री एवं विद्यमान राष्ट्राध्यक्ष रेसेप एर्दोगन इनकी हुकूमत में शुरू गतिविधियों की वजह से यूरोपीय देश तुर्की को महासंघ में शामिल करने से विरोध कर रहे है| कुछ वर्ष पहले शरणार्थियों के मुद्दे पर तुर्की के साथ समझौता करते समय महासंघ ने सदस्यत्व की प्रक्रिया आगे ढकेलने के संकेत दिए थे| लेकिन, उसी समय तुर्की में एर्दोगन के विरोध में हुए प्रदर्शन और उसके बाद की घटनाओं की वजह से यूरोप ने दुबारा नकारात्मक सूर अपनाना शुरू किया है|

जर्मनी, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, फान्स, डेन्मार्क, नेदरलैंड, ग्रीस जैसे देशों ने तुर्की की सदस्यता का विरोध किया है| महासंघ के अन्य देशों में से कई देशों ने तुर्की की सदस्यता को सशर्त समर्थन दिया है| उसी समय महासंघ की अलग अलग यंत्रणाओं में भी तुर्की के मुद्दे पर विवाद है| यूरोपियन कमिशन तुर्की के साथ बातचीत जारी रखने की तैयारी दिखा रही है, लेकिन यूरोपीय संसद इसके विरोध में है| इस गडबडी के माहौल के वजह से अबतक हुई बातचीत से ज्यादा कुछ स्पष्ट नही हो सका है, ऐसा विश्‍लेषकों का दावा है|

तुर्की में राष्ट्राध्यक्ष एर्दोगन के विरोध में हुए असफल विद्रोह के बाद एर्दोगन ने अपनाई भूमिका एवं शुरू कार्रवाई की वजह से यूरोपीय देशों में नाराजगी और भी बढ रही है| राष्ट्राध्यक्ष एर्दोगन इन्होंने संविधान में किया एक तरफा बदलाव उनका तानाशाही की दिशा में हो रहा सफर, माध्यमों के विरोध में हो रही कार्रवाई, मानवाधिकार का उल्लंघन जैसी बाते यूरोपीय देशों के लिए सिरदर्द साबित हुई है| कुछ महीने पहले एर्दोगन इन्होंने यूरोपीय माध्यमों के प्रतिनिधियों के विरोध में अपनाई भूमिका भी यूरोपीय देशों में तुर्की के विरोध में भावना और भी तीव्र करनेवाली साबित हुई है|

उसी समय यूरोपीय देशों में राष्ट्रवादी एवं राष्ट्रवादी विचारधारा के गुटों से एर्दोगन इनकी ‘इस्लाम’ के प्रति रही भूमिका को भी लगातार लक्ष्य किया जा रहा है| पिछले कुछ वर्षों में तुर्कीने यूरोप में इस्लाम का प्रचार करने के लिए शुरू की हुई कोशिश और उसे एर्दोगन हुकूमत का प्राप्त हो रहा समर्थन, यह विवाद का मुद्दा बना था| शरणार्थियों के झुंड को लेकर यूरोप में तनाव बढ रहा है, यह मुद्दा भी आग में घी डालनेवाला साबित हुआ था|

इस पृष्ठभूमि पर तुर्की का महासंघ में प्रवेश हो लगभग नामुमकिन होने के संकेत प्राप्त हो रहे है और एर्दोगन ने भी इसकी जरूरत ना होने का वक्तव्य इससे पहले ही किया है| यूरोपीय संसद में मंजूर हुआ यह प्रस्ताव यूरोपीय देशों का कल स्पष्ट कर रहा है और नजदिकी समय में तुर्की के साथ चर्चा शुरू होने की संभावना खतम होने का एहसास देनेवाला है, यह की बात मानी जा रही है|