देशों से हो रहे साइबर हमलों में बढ़ोतरी – ‘यूरोपोल’ की चेतावनी

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हेग – पिछले कुछ वर्षों में हुए साइबर हमलों में ‘रैनसमवेअर’ का प्रमाण बढ़ता जा रहा है और उसके पीछे विभिन्न देशों का हाथ होने की बात सामने आ रही है, ऐसी चेतावनी ‘यूरोपोल’ की साइबर रिपोर्ट में दी गई है। कुछ दिनों पहले ईरानी हैकर्स ने ऑक्सफर्ड, केम्ब्रिज और ब्रिटन के अन्य विश्वविद्यालयों की वेबसाइटों पर हमला करके संवेदनशील जानकारी की ऑनलाइन चोरी की थी।

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यूरोपीय महासंघ की पुलिस यंत्रणा के तौर पर पहचाने जाने वाले ‘यूरोपोल’ ने हाल ही में ‘२०१८ इन्टरनेट ऑर्गनाइज्ड क्राइम थ्रेट असेस्मेंट’ रिपोर्ट प्रसिद्ध की है। इस रिपोर्ट में साइबर अपराधों की बढती व्याप्ति और उसके प्रकार की विस्तृत जानकारी दी गई है। उसमें ‘रैनसमवेअर’ और ‘डीडीओएस अटैक्स’ इन प्रकारों के साइबर अपराधों का प्रमाण ज्यादा है, ऐसा लिखा गया है।

पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराधों में बहुत ही प्रगत तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है और इस वजह से साइबर हमले या अपराधों में एखाद अपराधिक समूह, हैकर अथवा एखाद देश है, यह पहचानना अधिक कठिन हुआ है, ऐसी चिंता इस रिपोर्ट में व्यक्त की गई है।

रैनसमवेअर प्रकार में वॉन्ना क्राय और नॉट पेट्या इन दो सायबर हमलों का उल्लेख करके इन दोनों हमलों के पीछे किसी हैकर्स समूह का नहीं बल्कि सीधे देशों का हाथ था और ऐसे प्रकार के हमलों का प्रमाण बढ़ रहा है और यह नया खतरा है, ऐसी चेतावनी यूरोपोल ने दी है। वॉन्ना क्राय इस साइबर हमले में लगभग १५० देशों के दो लाख से अधिक कंप्यूटर्स को लक्ष्य बनाया गया था। इसमें उत्तर कोरिया का हाथ होने की जानकारी सामने आई थी।

नॉट पेट्या के साइबर हमले में अमरिका और यूरोपीय देशों की बड़ी कंपनियों को लक्ष्य बनाया गया था। इस हमले की वजह से अरबों डॉलर्स का नुकसान होने का दावा किया जा रहा है। अमरिका और ब्रिटन की यंत्रणाओं ने इस हमले के पीछे रशिया का हाथ होने का आरोप लगाया था। अमरिका में पिछले कुछ वर्षों में हुए साइबर हमलों के पीछे चीन का हाथ होने का आरोप भी लगातार किया जा रहा था।

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