भारत के ऐतराज पर ग़ौर करके ‘सीपीईसी’ के नाम में तबदीली करने की चीन की तैयारी

नवी दिल्ली, दि. ८ : ‘चायना पाकिस्तान इकॉनॉमिक कॉरिडॉर’ (सीपीईसी) इस परियोजना को सम्प्रभुता के मुद्दे से भारत ने विरोध दर्शाया है| भारत को इस परियोजना के लिए होनेवाला ऐतराज देखते हुए चीन ने इस परियोजना के नाम में तबदीली करने की तैयारी दिखाई है। चीन के भारत स्थित राजदूत ‘लुओ झाओहुई’ ने यह घोषणा की है| पिछले कुछ दिनों में चीन की भारतसंबंधी नीति में आई सौम्यता का एक और उदाहरण सामने आया है|

‘सीपीईसी’दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश की यात्रा के बाद चीन ने भारत के खिलाफ ज़हरीली भूमिका अपनाई थी| चीन के विदेशमंत्रालय और वरिष्ठ अधिकारियों ने दलाई लामा के मुद्दे को लेकर, भारत को धमकी और इशारे देने का सिलसिला जारी रखा था| यही नहीं, बल्कि अरुणाचल प्रदेश स्थित स्थानों के नाम बदल कर चीन ने भारत को उक़साया था| लेकिन इसके बाद चीन ने भारतसंबंधी भूमिका में बदलाव किये हैं ऐसा दिखाई दे रहा है| भारत को यदि ऐतराज़ है, तो चीन को ‘सीपीईसी’ परियोजना छोड़नी चाहिए, ऐसी माँग चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने खुलेआम की थी|

उसके बाद चीन ने ‘सीपीईसी’ परियोजना के बारे में उदार नीति अपनाने की तैयारी दिखाई है| जापान में हुए ‘एशियन डेव्हलपमेंट बँक’ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते समय भारत के वित्तमंत्री ने, चीन की ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) परियोजना पर ऐतराज़ जताया था| ‘सीपीईसी’ परियोजना ‘ओबीओआर’ का हिस्सा मानी जाती है|

‘इस परियोजना को सम्प्रभुता के मुद्दे पर भारत कर रहा विरोध और कश्मीर मसले पर भारत की भूमिका समझने जैसी है| लेकिन भारत इस वजह से यदि ‘सीपीईसी’ परियोजना को विरोध कर रहा है, तो चीन इस परियोजना के नाम में बदलाव के लिए तैयार है’ ऐसी तैयारी चीन के राजदूत ने नयी दिल्ली में एक कार्यक्रम में बात करते समय दिखाई|

कश्मीर मसले पर चीन लगातार पाकिस्तान का पक्ष ले रह है, इस आरोप को चीन के राजदूत ने नकारा है| कश्मीर समस्या यह भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मसला है और वह दोनों देशों को चर्चा के जरिये सुलझाना चाहिए, ऐसी चीन की भूमिका है| इस मसले में दखलअंदाज़ी करने में चीन को दिलचस्पी नहीं है, ऐसा चिनी राजदूत ने कहा है|

‘ओबीओआर’ परियोजना पर चीन ने एक आंतर्राष्ट्रीय परिषद का आयोजन किया है और भारत इस परिषद में शामिल हों, ऐसा आवाहन चीन की ओर से लगातार किया जा रहा है| इस समय चीन की भारतसंबंधी भूमिका में सौम्यता आयी है, यह महज़ संजोग की बात नहीं है| भारत इस परिषद में शामील हुआ, तो चीन की इस महत्त्वाकांक्षी परियोजना की कामयाबी की संभावना और भी बढेगी, इसका एहसास चीन को है और इसीलिए चीन भारत का मन रखने की कोशिश कर रहा है| लेकिन भारत ने चीन को प्रतिसाद नहीं दिया है|

‘मसूद अझहर’ और अन्य पाकिस्तानी आतंकवादियों के लिए संयुक्त राष्ट्रसंघ की सुरक्षापरिषद में नकाराधिकार का इस्तेमाल करनेवाले चीन के खिलाफ भारत के लोगों में काफी गुस्सा है| उसी समय, भारत की ‘एनएसजी’ सदस्यता को विरोध करके चीन ने भारतीय लोगों के गुस्से को और बढाया है| इतना होने के बाद, अपनी ‘ओबीओआर’ योजना के लिए भारत का समर्थन हासिल करने की कोशिश करनेवाला चीन, भारत से सहयोग की उम्मीद नहीं रख सकता है, ऐसा संदेश भारत के सूखे प्रतिसाद से चीन को दिया जा रहा है|