श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग २३)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग २३)

हम ने साईनाथ का उत्तम भक्त बनने के लिए यानी श्रीराम का वानरसैनिक बनने के लिए गेहूँ पीसने की इस कथा से हमें क्या सीखना चाहिए, इस बात का अध्ययन करना गत लेख से शुरू किया है । सिर्फ़ कथा को पढ़ लिया, पारायण कर लिया, परन्तु बोध ग्रहण किये बिना अपने आचरण में कुछ […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग २२)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग २२)

गेहूँ पीसनेवाली कथा की उन चार औरतों की भूमिका (किरदार) के बारे में हम अध्ययन कर रहे हैं । हमें इन सभी कथाओं में विशेष तौर पर किस बात पर ध्यान देना चाहिए? इस प्रश्‍न का उत्तर है- भक्तों की भूमिका पर, उनके आचरण पर । ये मेरे साईनाथ, मेरे राम अपनी ‘भूमिका’ सदैव ही […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग २१)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग २१)

हमें यदि सहज, सरल एवं सुंदर रूप से प्रेमप्रवास करना है, तो हमारे लिए केवल इस सद्गुरुतत्त्व के अलावा अन्य कोई मार्गदर्शक है ही नहीं, केवल ये साईनाथ ही हमारे समुद्धारकर्ता हैं, इस बात का हमें सदैव स्मरण रखना ज़रूरी है । दो हाथ एक माथा । स्थैर्य-श्रद्धा-अनन्यता । ना चाहे कुछ और साईनाथ । […]

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श्री साई सच्चरित अध्याय १ (भाग २०)

श्री साई सच्चरित अध्याय १ (भाग २०)

साई बाबा की गेहूँ पीसनेवाली लीला यानी भोले-भाले भक्तों के लिए परमार्थ सहज सामान्य करके दिखा देने की क्रिया । जाते के दोनों तह और खूंटा इनके एकत्र आजे से जैसे गेहूँ पीसने की क्रिया होती है इसी के साथ गेहूँ का रूपांतर आटे में होता है, उसी प्रकार श्रद्धा और सबुरी एवं अनन्यता इन […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १९)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १९)

जन्म देनेवाली माँ अपने बच्चे को नौ महीने के बाद पेट से बाहर निकालती है तब यह साईमाऊली अपने बच्चों को प्रेमवश अपने सीने से लगाये रखते हैं, कभी उनका तिरस्कार नहीं करते (कभी उन्हें फेंकते नहीं) । ‘मैं कद्यपि तुम्हारा त्याग नहीं करूँगा’ यह इस साईमाऊली का ‘वात्सल्यब्रीद’ ही है और भक्तों के अनगिनत […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १८)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १८)

आज संपूर्ण विश्व ही जैसे आय. सी. यू. में है और ऐसी भीषण स्थिति से विश्व को बचानेवाला धन्वन्तरि एकमात्र मेरा यह साईनाथ ही है | शिरडी में आई महामारी के संकट से बाबा ने जिस तरह शिरडी को बचाया, उसी तरह इस तृतीय विश्‍वयुद्ध की महामारी से भी ये मेरे साईनाथ ही संपूर्ण विश्व […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १७)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १७)

परमात्मा जब किसी भी कार्य का आरंभ करते हैं, तब यह स्वाभाविक है कि वह कार्य उन्होंने मनुष्य के लिए ही आरंभ किया होता है; परन्तु इस बात का पता चलने के लिए मनुष्य को समय लगता है | हमने इससे पहले ही यह देखा कि परमात्मा के कार्य का अवलोकन करने को मिलना यह […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १६)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १६)

भारतीय अध्यात्मशास्त्र कभी भी किसी भी मनुष्य को खोखला वैराग्य नहीं सिखाता, बल्कि गृहस्थी में रहकर परमार्थ कैसे करना चाहिए यही सिखाता है। भक्ति करना यानी बाकी के सारे काम-काज छोड़कर व्यर्थ की डिंगें हॉंकते हुए माथा-पच्छी करना यह जो एक दृष्टिकोण है, उसे इस गेहूँ पीसनेवाली कथा के माध्यम से ही पूर्ण रूप में […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १५) उद्धरेत् आत्मना आत्मानम्

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १५) उद्धरेत् आत्मना आत्मानम्

महामारी का निर्दलन करने में साईनाथजी तो समर्थ हैं ही, मुद्दा यह है कि मुझे इस कथा से क्या सीखना चाहिए? मुझे यह सीखना चाहिए कि मन के सारे संकल्प-विकल्प छोडकर यह मेरा साईनाथ ही सत्य संकल्पप्रभु है, इस दृढ़ विश्वास के साथ साईबाबा के कार्य में अपनी पूर्ण क्षमता के अनुसार मुझे शामिल हो […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १४) साईसच्चरित-नदी का उद्गम

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १४) साईसच्चरित-नदी का उद्गम

हेमाडपंतजी कहते हैं कि यह गेहूँ पीसने की लीला बाबा ने मेरे जीवन में घटित कर इस साईसच्चरित को प्रकट करवाया। मेरे जीवन में बाबा ने जॉंते के दोनों पत्थरों को सक्रिय कर दिया, नीचेवाला पत्थर यानी श्रद्धा और ऊपरवाला पत्थर यानी सबूरी इन दोनों को सदैव कार्यरत करनेवाले मेरे बाबा ही हैं। इन पत्थरों […]

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