परमहंस-६९

परमहंस-६९

पाच-छः दिन बनारस में वास्तव्य करने के बाद रामकृष्णजी एवं मथुरबाबू अन्य लोगों के साथ प्रयाग के लिए रवाना हुए। वहाँ पर उन्होंने तीन दिन निवास किया। इस वास्तव्य के दौरान वहाँ के पवित्र संगम में सबने स्नान किया। उसीके साथ, वहाँ पर कुछ धार्मिक विधियाँ करते हुए वहाँ की प्रथा के अनुसार पुरुषों ने […]

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परमहंस-६८

परमहंस-६८

अपने बनारसवास्तव्य के दौरान, महान योगी होनेवाले त्रैलंग स्वामीजी से मिलने रामकृष्णजी चले गये। स्वामीजी उस समय मौनव्रत धारण किये हुए थे और उनका वास्तव्य मनकर्णिका घाट पर था। रामकृष्णजी को देखते ही स्वामीजी ने प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया और संकेत से ही उन्हें बैठने के लिए कहकर, उनके स्वागत हेतु अपनी तपकीर सूँघने की […]

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परमहंस-६७

परमहंस-६७

बनारस पहुँचते समय भी रामकृष्णजी को उस प्रकाशनगरी को लेकर एक चमत्कृतिपूर्ण दृष्टान्त हुआ था, जिसे उन्होंने बनारस पहुँचते ही मथुरबाबू को बयान किया था। जैसे ही बनारस नगरी दूर से दिखायी देने लगी, तभी हुए इस दृष्टान्त में उन्होंने ऐसा दृश्य देखा कि ‘पुरातन समय से शिवजी का स्थान मानी गयी यह काशीनगरी, यह […]

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परमहंस-६६

परमहंस-६६

कामारपुकूर के इस वास्तव्य के दौरान रामकृष्णजी की मुलाक़ात हृदय की माँ हेमांगिनीदेवी के साथ हुई। उस वयोवृद्ध माता ने रामकृष्णजी के बारे में सुना ही था। इस भेंट के दौरान उसने रामकृष्णजी के चरण छूकर उन्हें प्रणाम किया। रामकृष्णजी जब उससे बातें कर रहे थे, तब बातों बातों में उसने, मेरी मृत्यु काशी (बनारस) […]

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परमहंस-६५

परमहंस-६५

रामकृष्णजी का कामारपुकूर में दैनंदिन जीवन शुरू था। पत्नी शारदादेवी, अपने पति की उच्च योग्यता को पहचानकर उनकी सेवा में निमग्न थी। उनकी पत्नी तो वह थी ही, साथ ही अब वह उनकी निस्सीम भक्त एवं प्रथम शिष्या भी बनी। ‘रामकृष्णजी’ ही उसके जीवन की केंद्रबिंदु बने थे। छोटी छोटी बातों के लिए भी वह […]

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परमहंस-६४

परमहंस-६४

रामकृष्णजी को हो रही दस्त की तीव्र परेशानी छः महीनों बाद अपने आप ही धीरे धीरे कम होती जाकर बन्द भी हुई। अद्वैतसिद्धांत साधना के मार्ग पर रामकृष्णजी ने तेज़ी से प्रगति की थी और इतनी शारीरिक पीड़ा होते हुए भी, मन को शारीरिक एवं भौतिक विषयों से अलग करना उन्हें आसानी से संभव होता […]

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परमहंस-६३

परमहंस-६३

रामकृष्णजी को अद्वैत साधना के सर्वोच्च स्थान पर स्थिर करने का ध्यास लिये तोतापुरी की ही अपूर्ण रह चुकी साधना जब इस उपलक्ष्य में पूर्णत्व को प्राप्त हुई, तब वे रामकृष्णजी से विदा लेकर अगली यात्रा के लिए चले गये। रामकृष्णजी लगभग अगले ५-६ महीने इस स्थिति में थे और इस दौरान उन्होंने कई बार […]

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परमहंस-६२

परमहंस-६२

तीन दिन बीत जाने के बावजूद भी रामकृष्णजी निर्विकल्प समाधिअवस्था में से बाहर नहीं आ रहे हैं, यह दृश्य तोतापुरी विस्मयचकित होकर देखते ही रहे थे। उन्हें चालीस सालों की कठिन उपासनाओं के बाद जो प्राप्त हुआ था, उसे रामकृष्णजी ने अद्वैतसाधना के मार्ग पर कदम रखने के एक ही दिन में प्राप्त किया था! […]

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परमहंस-६१

परमहंस-६१

तोतापुरी के मार्गदर्शन में अद्वैत सिद्धांत उपासना करते समय, उनके द्वारा बतायेनुसार रामकृष्णजी का अन्य भौतिक बातों का एहसास, उनका भान हालाँकि कम होता जाता था, मग़र फिर भी कालीमाता का रूप, उसका नाम भूलना उन्हें अभी भी संभव नहीं हो पा रहा था। कई बार प्रयास करके भी जब सफलता प्राप्त नहीं हो रही […]

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परमहंस-६०

परमहंस-६०

दास्य, सख्य, वात्सल्य? आदि नवविधा भक्ति, साथ ही तांत्रिक उपासना ये पड़ाव लाँघकर रामकृणजी ने अब अद्वैत सिद्धांत की उपासना का आरंभ किया था। उसके लिए आवश्यक वह सारी पूर्वतैयारी उनसे उनके इस साधना के गुरु तोतापुरी ने करा ली थी। इस साधना के लिए साधक द्वारा संन्यास लिया जाना आवश्यक होने के कारण, तोतापुरी […]

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