परमहंस-७८

परमहंस-७८

षोडशी पूजा के बाद शारदादेवी रामकृष्णजी के ही कमरे में रहने लगीं। लेकिन कई बार ऐसा होता था कि रामकृष्णजी भावसमाधि को प्राप्त होते थे और वे कब फिर से सभान होंगे यह कहा नहीं जा सकता था। इस कारण बौखला गयीं शारदादेवी उतने समय तक जागती रहती थीं। समाधिअवस्था में होते समय रामकृष्णजी का […]

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परमहंस-७७

परमहंस-७७

रामकृष्णजी के पश्‍चात् ‘रामकृष्णसंप्रदाय’ में जिन्हें ‘होली मदर’ के नाम से अत्यधिक सम्मान की भावना से देखा गया, उन रामकृष्णजी की पत्नी को – शारदादेवी को हम भी इसके आगे बहुमानार्थी ही संबोधित करेंगे। इस प्रकार रुक रुककर, तेज़ बुखार का सामना करते हुए शारदादेवी आख़िर दक्षिणेश्‍वर पहुँच गयीं। अपनी पत्नी को – शारदादेवी को […]

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परमहंस-७६

परमहंस-७६

मथुरबाबू का रामकृष्णजी के साथ परिचय होकर पंद्रह से भी अधिक साल बीत चुके थे। रामकृष्णजी से पहली ही बार मिलने के बाद कुछ ही दिनों में, रामकृष्णजी के दिव्यत्व को पहचान गये मथुरबाबू का व्यक्तित्व उनके सान्निध्य में सोने की तरह चमक उठा था। ‘ये कोई तो हैं’ इस धारणा से शुरू हुआ प्रवास […]

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परमहंस-७५

परमहंस-७५

यह सारा वाक़या जब घटित हो रहा था, तब भगवानदासजी नाम की माला भी जप रहे थे। ‘आप जैसे साक्षात्कारी महान भक्त को माला जपने की भला क्या ज़रूरत है’ ऐसा हृदय द्वारा उनसे पूछा जाने के बाद, ‘मुझे ज़रूरत नहीं है यह मैं जानता हूँ, लेकिन कई आम लोग मेरा अनुकरण करने जाते हैं, […]

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परमहंस-७४

परमहंस-७४

रामकृष्णजी मथुरबाबू के गाँव में निवास कर दक्षिणेश्‍वर लौटने के कुछ ही दिनों में एक विलक्षण घटना घटित हुई! कोलकाता के पास के कोलुताला गाँव में कालीनाथ दत्त नामक एक वैष्णवसंप्रदायी भक्त रहते थे। पंद्रहवीं सदी के महान वैष्णव सन्त ‘गौरांग चैतन्य महाप्रभु’ ये उनके आराध्यदेवता थे। उनके घर में हमेशा उनके ‘चैतन्य महाप्रभु’ संप्रदाय […]

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परमहंस-७३

परमहंस-७३

इस अनुभव के बाद हृदय के सिर पर सवार हुआ, आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त करने का जुनून निकल गया था। लेकिन उस साल, नवरात्रि में तीन दिन दुर्गापूजा मनायी जायें, ऐसा विचार हृदय के मन में उठा। रामकृष्णजी से अनुमति मिली और वह हर्षोल्लास के साथ काम में जुट गया। इस पूजन के लिए देवीमाता की […]

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परमहंस-७२

परमहंस-७२

देर रात पंचवटी की दिशा में निकले रामकृष्णजी का पीछा करते हुए चलनेवाले हृदय को ऐसा दिखायी दिया कि रामकृष्णजी भौतिक हड्डी-माँस के न बने होकर, वे तो प्रकाशरूप बन गये हैं। लेकिन उससे भी अधिक, उसने जब सहज ही अपने शरीर को देखा, तो उसे अधिक बड़ा आश्‍चर्य का झटका लगा। वह स्वयं भी […]

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परमहंस-७१

परमहंस-७१

तीर्थयात्रा से रामकृष्णजी, मथुरबाबू और अन्य जन पुनः दक्षिणेश्‍वर लौट आने के कुछ ही दिन बाद एक दुखदायी घटना घटित हुई – हृदय की पत्नी का देहान्त हो गया। वैसे देखा जाये, तो हृदय हालाँकि अपने मामा की – रामकृष्णजी की सेवा दिल लगाकर करता था, मग़र फिर भी वह मूलतः बहुत ही व्यवहारी और […]

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परमहंस-७०

परमहंस-७०

इस प्रकार आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्त्वपूर्ण स्थानों की भेंट से तथा आध्यात्मिक ऊँचाई हासिल किये साधकों की मुलाक़ातों से, इस तीर्थयात्रा का वृंदावनस्थित चरण रामकृष्णजी के लिए अत्यधिक भावपूर्ण प्रतीत हुआ था। वृंदावन के ध्रुवघाट पर उन्हें ‘वसुदेव नन्हें से श्रीकृष्ण को सिर पर रखी टोकरी में लेकर जमुना पार कर आ रहे […]

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परमहंस-६९

परमहंस-६९

पाच-छः दिन बनारस में वास्तव्य करने के बाद रामकृष्णजी एवं मथुरबाबू अन्य लोगों के साथ प्रयाग के लिए रवाना हुए। वहाँ पर उन्होंने तीन दिन निवास किया। इस वास्तव्य के दौरान वहाँ के पवित्र संगम में सबने स्नान किया। उसीके साथ, वहाँ पर कुछ धार्मिक विधियाँ करते हुए वहाँ की प्रथा के अनुसार पुरुषों ने […]

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