श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १८)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १८)

आज संपूर्ण विश्व ही जैसे आय. सी. यू. में है और ऐसी भीषण स्थिति से विश्व को बचानेवाला धन्वन्तरि एकमात्र मेरा यह साईनाथ ही है | शिरडी में आई महामारी के संकट से बाबा ने जिस तरह शिरडी को बचाया, उसी तरह इस तृतीय विश्‍वयुद्ध की महामारी से भी ये मेरे साईनाथ ही संपूर्ण विश्व […]

Read More »

कार्ल लिनीयस (१७०७-१७७८)

कार्ल लिनीयस (१७०७-१७७८)

७७०० वनस्पति, ४४०० प्राणि और केवल एक मनुष्य! कुल मिलाकर ४५ वर्षों के कार्यकाल के अन्तर्गत कार्ल लिनियस नामक शास्त्रज्ञ द्वारा किया गया संशोधन। अठारहवी सदी में केवल एक टेलिस्कोप, सूक्ष्म दर्शक यंत्र, एक बड़ी छुरी एवं कागज़ इतनी ही साधनसामग्री उपलब्ध होने के बावजूद भी अपनी पूरी लगन एवं (परिश्रम के साथ) कुछ करने […]

Read More »

डॉ.निकोल टेसला – ह्युमनॉईड रोबोटिक्स

डॉ.निकोल टेसला – ह्युमनॉईड रोबोटिक्स

इस जबरदस्त यांत्रिक ज्ञान का लाभ अमेरिका के संरक्षणोदलों को उपलब्ध करके देने वाला प्रस्ताव डॉ.टेसला ने ही प्रस्तुत किया था। इस यांत्रिक ज्ञानपर आधारित पणडुब्बियाँ एवं पाणतीर (टोर्पेडो) उसी प्रकार वायरलेस इलेक्ट्रिसिटी पर चलने वाली युद्ध नौकाओं के प्रस्ताव डॉ.टेसला ने अमेरिकन नौदल को दिया। परन्तु अमेरिकन नौदल ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर […]

Read More »

समय की करवट (भाग ३) – पुनः ‘इंडिया’

समय की करवट (भाग ३) – पुनः ‘इंडिया’

समय करवट बदलते समय दुनिया में, ख़ासकर भारत में क्या स्थित्यन्तर हो रहे हैं, यह हम देख रहे हैं। हमारा देश ‘इंडिया’ बनाम ‘भारत’ इनमें कैसे विभाजित हुआ है, यह जानने की हम कोशिश कर रहे हैं। खुली हवा में रपट करने की अपेक्षा नेट पर के ‘फ़ार्मव्हिले’ में अपना जी रिझानेवाली, वक़्त आने पर […]

Read More »

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १७)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १७)

परमात्मा जब किसी भी कार्य का आरंभ करते हैं, तब यह स्वाभाविक है कि वह कार्य उन्होंने मनुष्य के लिए ही आरंभ किया होता है; परन्तु इस बात का पता चलने के लिए मनुष्य को समय लगता है | हमने इससे पहले ही यह देखा कि परमात्मा के कार्य का अवलोकन करने को मिलना यह […]

Read More »

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग ७)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग ७)

भक्ति के ऐसे अनेक लक्षण। एक से बढ़कर एक विलक्षण । हम सिर्फ गुरुकथानुस्मरण कर (का अनुसरण कर) । सुखे पैरों(कदमों/चरणों) ही भवसागर तर जायें॥(तर जाये भवसागर) (श्रीसाईसच्चरित १/१०१) ‘गुरुकथानुस्मरण’ यही है वह भक्ति की आसान पगदंडी, जो हेमाडपंत हमें दिखा रहे हैं। इस भवसागर को सूखे कदमों से तर जाने के लिए यही पगदंडी […]

Read More »

नेताजी-४

नेताजी-४

सुभाषबाबू के जीवन में दाखिल हो चुके स्वामी विवेकानन्दजी ने उन्हें बाह्य-आभ्यन्तर भारित कर दिया था। अपने जीवन का हेतु ही मानो स्वामीजी समझा रहे हैं, ऐसा उन्हें लगा। विवेकानन्दजी के विचार पुरोगामी ही थे। भोगवादी संस्कृतिप्रधान पश्चिमी देशों में जब भारत के बारे में रहनेवाले घोर अज्ञान के कारण भारत से संबंधित ग़लत धारणाएँ […]

Read More »
1 466 467 468