अस्थिसंस्था (भाग-२)

अस्थिसंस्था (भाग-२)

पिछले लेख में हमने मानवी शरीर में स्थित अस्थि-कंकाल के बारे में सामान्य जानकारी प्राप्त की| हमारे शरीर की अस्थियॉं मूलत: अस्थिपेशियों से बनी होती है| ये पेशियॉं हड्डियों में कॅल्शियम की आपूर्ति करती है| बोन मॅट्रिक्स (दो पेशियों के बीच की जगह) कॅल्शिअम के संयुगों की बनी होती है| किसी इमारत की दीवार में […]

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काशी भाग- ४

काशी भाग- ४

काशी के अधिकतम चित्रों में गंगाकिनारे के घाट और उन घाटों पर रहनेवाली विशेषतापूर्ण छत्रियाँ दिखायी देती हैं। दरअसल वाराणसी-काशी में गंगाजी के तट पर घाटों का निर्माण किया गया, वह मनुष्यों की सहूलियत के लिए; क्योंकि काशी आनेवालें और काशी में बसनेवालें पवित्र गंगाजी में स्नान तो अवश्य करेंगे ही। १२वी सदी के गाहडवाल […]

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ऑनलाईन गोलमाल

ऑनलाईन गोलमाल

आजकल ऑनलाईन कार्यक्रमों के प्रोग्रामों का दौर है| ऑनलाईन चोरियों के बारे ङ्कें भी आपने पढा होगा| मुंबई में इस तरह की दो-तीन घटनाओं का पर्दा फाश हुआ है, जिनमें कितने ही लाखों की ऑनलाईन चोरी की गई है| वर्तमान समय में उपलब्ध जानकारी के अनुसार फेस बुक के उपयोग में लगभग ६६ दस-लक्ष खातेधारकों […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १८)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १८)

आज संपूर्ण विश्व ही जैसे आय. सी. यू. में है और ऐसी भीषण स्थिति से विश्व को बचानेवाला धन्वन्तरि एकमात्र मेरा यह साईनाथ ही है | शिरडी में आई महामारी के संकट से बाबा ने जिस तरह शिरडी को बचाया, उसी तरह इस तृतीय विश्‍वयुद्ध की महामारी से भी ये मेरे साईनाथ ही संपूर्ण विश्व […]

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कार्ल लिनीयस (१७०७-१७७८)

कार्ल लिनीयस (१७०७-१७७८)

७७०० वनस्पति, ४४०० प्राणि और केवल एक मनुष्य! कुल मिलाकर ४५ वर्षों के कार्यकाल के अन्तर्गत कार्ल लिनियस नामक शास्त्रज्ञ द्वारा किया गया संशोधन। अठारहवी सदी में केवल एक टेलिस्कोप, सूक्ष्म दर्शक यंत्र, एक बड़ी छुरी एवं कागज़ इतनी ही साधनसामग्री उपलब्ध होने के बावजूद भी अपनी पूरी लगन एवं (परिश्रम के साथ) कुछ करने […]

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डॉ.निकोल टेसला – ह्युमनॉईड रोबोटिक्स

डॉ.निकोल टेसला – ह्युमनॉईड रोबोटिक्स

इस जबरदस्त यांत्रिक ज्ञान का लाभ अमेरिका के संरक्षणोदलों को उपलब्ध करके देने वाला प्रस्ताव डॉ.टेसला ने ही प्रस्तुत किया था। इस यांत्रिक ज्ञानपर आधारित पणडुब्बियाँ एवं पाणतीर (टोर्पेडो) उसी प्रकार वायरलेस इलेक्ट्रिसिटी पर चलने वाली युद्ध नौकाओं के प्रस्ताव डॉ.टेसला ने अमेरिकन नौदल को दिया। परन्तु अमेरिकन नौदल ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर […]

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समय की करवट (भाग ३) – पुनः ‘इंडिया’

समय की करवट (भाग ३) – पुनः ‘इंडिया’

समय करवट बदलते समय दुनिया में, ख़ासकर भारत में क्या स्थित्यन्तर हो रहे हैं, यह हम देख रहे हैं। हमारा देश ‘इंडिया’ बनाम ‘भारत’ इनमें कैसे विभाजित हुआ है, यह जानने की हम कोशिश कर रहे हैं। खुली हवा में रपट करने की अपेक्षा नेट पर के ‘फ़ार्मव्हिले’ में अपना जी रिझानेवाली, वक़्त आने पर […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १७)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग १७)

परमात्मा जब किसी भी कार्य का आरंभ करते हैं, तब यह स्वाभाविक है कि वह कार्य उन्होंने मनुष्य के लिए ही आरंभ किया होता है; परन्तु इस बात का पता चलने के लिए मनुष्य को समय लगता है | हमने इससे पहले ही यह देखा कि परमात्मा के कार्य का अवलोकन करने को मिलना यह […]

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श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग ७)

श्रीसाईसच्चरित अध्याय १ (भाग ७)

भक्ति के ऐसे अनेक लक्षण। एक से बढ़कर एक विलक्षण । हम सिर्फ गुरुकथानुस्मरण कर (का अनुसरण कर) । सुखे पैरों(कदमों/चरणों) ही भवसागर तर जायें॥(तर जाये भवसागर) (श्रीसाईसच्चरित १/१०१) ‘गुरुकथानुस्मरण’ यही है वह भक्ति की आसान पगदंडी, जो हेमाडपंत हमें दिखा रहे हैं। इस भवसागर को सूखे कदमों से तर जाने के लिए यही पगदंडी […]

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नेताजी-४

नेताजी-४

सुभाषबाबू के जीवन में दाखिल हो चुके स्वामी विवेकानन्दजी ने उन्हें बाह्य-आभ्यन्तर भारित कर दिया था। अपने जीवन का हेतु ही मानो स्वामीजी समझा रहे हैं, ऐसा उन्हें लगा। विवेकानन्दजी के विचार पुरोगामी ही थे। भोगवादी संस्कृतिप्रधान पश्चिमी देशों में जब भारत के बारे में रहनेवाले घोर अज्ञान के कारण भारत से संबंधित ग़लत धारणाएँ […]

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