‘आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ के कारण देशों में जंग शुरू होगी – चीन के नेता एवं विश्‍लेषकों ने जताई चिंता

Third World Warवॉशिंगटन: रक्षा क्षेत्र में ‘आर्टिफिशल इंटेलिजन्स’ (एआई) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बढता इस्तेमाल बरकरार रहा तो दो देशों में युद्ध शुरू होगा| ‘एआई’ से जागितक शांति को खतरा बना है, यह चिंता चीन के वरिष्ठ नेता एवं लष्करी विश्‍लेषकों को सता रही है| ‘सेंटर फॉर ए न्यू अमरिकन सिक्युरिटी’ (सीएनएएस) इस अमरिकी अभ्यास गुट ने प्रसिद्ध किए अपने अहवाल में यह जानकारी दी है|

आर्टिफिशल इंटेलिजन्स, कारण, देशों, जंग शुरू होगी, चीन, नेता, विश्‍लेषकों, जताई, चिंताफिलहाल विश्‍व के प्रमुख देशों ने अपनी रक्षा क्षेत्र में ‘एआई’ का बडी मात्रा में इस्तेमाल शुरू किया है| मानव रहित गश्ती विमान – ‘ड्रोन’ उसका सही नमूना है| ‘एआई’ से लैस इन ड्रोन के इस्तेमाल में बढोतरी हुई तो युद्ध से जुडे तय नियमों मा उल्लंघन हो सकता है| इससे गडबडी बढेगी और उसमें से संघर्ष का विस्फोट होगा, यह चेतावनी ‘सीएनएएस’ ने इस अहवाल में दी है| चीन में एक अधिकारी ने बोलते समय हमें यह जानकारी दी है, ऐसा ‘सीएनएएस’ के वरिष्ठ विश्‍लेषक ‘ग्रेगरी ऍलन’ इन्होंने ने बताया है|

अमरिका के ड्रोन्स चीन की चिंता का कारण साबित हो रहे है, यह जानकारी ऍलन इन्होंने रखी है| अमरिकी ड्रोन्स आकार में छोटे और पूरी तरह से ‘एआई’ पर आधारित होने से उडान भरने से मुहीम को अंजाम देने की जिम्मेदारी इन्ही डोन्स पर रहती है| वही, चीन ने भी आक्रामक ड्रोन्स का निर्माण करके खाडी एवं अफ्रीकी देशों को निर्यात करना शुरू किया है| इन ड्रोन्स में ‘एआई’ के बढते इस्तेमाल पर चीन को चिंता सता रही है|

फिलहाल यह ड्रोन्स जमीन से पायलट नियंत्रित कर रहे है| लेकिन, ‘एआई’ से पूरी तरह से तैयार ‘ड्रोन्स’ आसमान में हथियारों की स्पर्धा का विस्फोट करेंगे और युद्ध भी शुरू कर सकते है, ऐसा इस चिनी अधिकारिने हमे बताया है, ऐसा ऍलन ने कहा| ‘एआई’ से लैस ड्रोन्स के इस्तेमाल से जीवित हानी कम होगी, इसमें सच्चाई भी है, लेकिन फिर भी इससे युद्ध होने का खतरा बढेगा, इसमें भी उतनी ही सच्चाई होने की याद ऍलन इन्होंने इस अहवाल से दिलाई है|

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अमरिका से ‘एआई’ का इस्तेमाल होने से चिंता व्यक्त कर रहे चीन ने भी हथियार और लष्करी सामग्री में ‘एआई’ का इस्तेमाल शुरू किया है, यह बात ऍलन इन्होंने रेखांकित की है| चीन ने सामाजिक स्तर पर भी ‘एआई’ का इस्तेमाल शुरू किया है और सरकारी दफ्तर, नीजि कंपनी, होटल ऐसी जगहों पर भी ‘एआई’ पर आधारित यंत्रणा मौजूद है| रक्षा क्षेत्र में चीन ने ड्रोन्स के अलावा ‘एआई’ से परिचालित टैंक, पनडुब्बी का परीक्षण किया था| इस ओर ध्यान आकर्षित करके ‘ऍलन’ ने चीन की चिंता बेवजह होने की बात कही है| साथ ही आनेवाले समय में ‘एआई’ से युद्ध शुरू हुआ तो उसके लिए चीन भी उतना ही जिम्मेदार रहेगा, यह दावा इस अमरिकी अभ्यास गुट ने अपने अहवाल में किया है|

इस दौरान, चीन ‘एआई’ में बडी मात्रा में निवेश कर रहा है, फिर भी अमरिका और रशिया की तुलना में चीन इन क्षेत्र में काफी पीछे है, ऐसा इस क्षेत्र के परिचितों का कहना है| इसी लिए इससे जुडा असंतुलन दूर करने के लिए चीन कडी कोशिश कर रहा है और उसके लिए यह तकनीक प्राप्त करने के लिए मेहनत कर रहा है| इस पृष्ठभुमि पर आर्टिफिशल इंटेलिजन्स से संबंधी चीन के विश्‍लेषकों ने व्यक्त की हुई यह चिंता ध्यान आकर्षित करनेवाली साबित होती है|