अलास्का की समुद्री सीमा में अमरिकी लड़ाकू विमानों ने रशियन बॉम्बर्स को रोका

तृतीय महायुद्ध, परमाणु सज्ज, रशिया, ब्रिटन, प्रत्युत्तर

वॉशिंग्टन/ मॉस्को – सीरिया के संघर्ष के बाद ईरान के मुद्दे को लेकर अमरिका और रशिया के बीच तनाव बढ़ रहा है, ऐसे में अलास्का में दोनों देशों के लड़ाकू विमान आमने सामने आने की घटना घटी है। अमरिका ने रशियन बॉम्बर्स को रोकने का दावा किया है, तो रशिया ने अपने विमान नियमित उड़ान भर रहे थे, ऐसा दावा किया है। कुछ दिनों पहले बाल्टिक और ‘ब्लैक सी’ समुद्री क्षेत्र में भी अमरिका और रशिया के लड़ाकू विमान खतरनाक रूपसे एकदूसरे के सामने घटनाएँ घटी थी।

अमरिकी रक्षादल के ‘नॉर्थ अमेरिकन एरोस्पेस डिफेन्स कमांड’ (नोराड) ने रशियन विमानों ने अलास्का में की घुसपैठ की जानकारी दी है। ‘शुक्रवार की सुबह १० बजे रशिया के टीयु-९५ बीअर बॉम्बर्स यह लड़ाकू विमान अलास्का के समुद्री क्षेत्र में घूमते हुए दिखाई दिए। अमरिका के एफ-२२ लड़ाकू विमानों ने उनको रोककर पीछे भगाया’, ऐसा ‘नोराड’ के प्रवक्ते एंड्रयू हेनेसी ने कहा है।

अलास्का

लेकिन रशिया के रक्षा विभाग ने अमरिका के दावों को ख़ारिज किया है। रशियन हवाई दल का ‘टीयु-९५ एमएस’ और ‘टीयु-१४२’ यह लड़ाकू बॉम्बर्स विमान आर्क्टिक महासागर की अंतर्राष्ट्रीय हवाई सीमा में नियमित उड़ान भर रहे थे, ऐसा रशियन रक्षा विभाग के निवेदन में कहा गया है। उसी समय इन विमानों के साथ ‘मिग-३१’ और ‘एसयु-३५’ यह लड़ाकू विमान भी थे, ऐसा रशिया ने दावा किया है।

लेकिन अमरिका ने अपने दावे में ‘एफ-२२’ लड़ाकू विमानों ने लगभग ३० मिनट से अधिक समय तक रशियन विमानों के साथ रहकर उनको अलास्का के ‘एयर डिफेन्स आयडेंटिफिकेशन जोन’ के बाहर ले जाने की बात कही है।

पिछले कुछ सालों में रशिया के लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और युद्धपोतों ने दुनिया के विविध इलाकों में बड़े पैमाने पर निगरानी और गश्त शुरू करने की घटनाएँ सामने आई हैं। अमरिका, यूरोप और कनाडा ने रशियन लड़ाकू विमान अपनी सीमा में खतरनाक तरीके से घुसने के दावे किये थे। अमरिकी युद्धपोतों के पास रशियन विमानों ने उड़ान भरने की तस्वीरें भी प्रसिद्ध हुईं थी।

अलास्का

पिछले कुछ महीनों में सीरिया का संघर्ष और ईरान के मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। ऐसी परिस्थिति में लड़ाकू विमानों ने खतरनाक तरीके से एक दूसरों के सामने आना अमरिका और रशिया के बीच नए संघर्ष की वजह साबित हो सकती है।

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