अफगानिस्तान में हुए आतंकी हमले में ४३ लोगों की मौत

तृतीय महायुद्ध, परमाणु सज्ज, रशिया, ब्रिटन, प्रत्युत्तर

काबुल – अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में आतंकीयों ने सरकारी दफ्तर पर किए हमले में ४३ लोगों की मृत्यु हुई है| इस वर्ष अफगानिस्तान में हुए सबसे भयंकर आतंकी हमलों में से यह एक हमला रहा है, यह दावा भी अफगान यंत्रणा कर रही है| किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी का स्वीकार नही किया है| अमरिकी सेना की अफगानिस्तान से वापसी होने के संबंधी हुए ऐलान की पृष्ठभुमि पर काबुल में हुए इस आतंकी हमले की ओर देखा जा रहा है|

काबुल की सार्वजनिक बांधकाम मंत्रालय की इमारत पर सोमवार के दिन यह आतंकी हमला हुआ| रायफल्स और विस्फोटकों के साथ आतंकियों ने इस सरकारी इमारत पर हमला किया| सुरक्षाकर्मियों का घेरा तोड कर इमारत के अंदर पहुचने के लिए आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी गाडी इमारत के प्रवेशद्वार पर टकराई| इसी का लाभ उठाकर अन्य आतंकियों ने सरकारी इमारत में घुंसकर सामने दिखे हर एक पर गोलियां बरसाई और इमारत में प्रमुख कार्यालय तक पहुंचने की कोशश की|

इस दौरान हमलावर आतंकी और सुरक्षाकर्मियों के बीच लगभग एक घंटा मुठभेड शुरू रही| इस दौरान कम से कम सौर अफगान इस इमारत में अटके पडे थे| लगभग घंटे भर चली इस मुठभेड के बाद इस हमले में शामिल हुए तीन आतंकियों को ढेर करने में सुरक्षाकर्मी सफल हुए, यह जानकारी अफगान सरकार ने दी है| इस हमले में एक पुलिस अधिकारी की भी मौत हुई है| वही १० लोग इस हमले में जख्मी हुए| मुठभेड के दौरान कुछ लोगों ने जान बचाने की कोशिश में खिडकी से छलांग भी लगाई|

अफगानिस्तान में हुए इस हमले की जिम्मेदारी किसी भी आतंकी संगठन ने स्वीकारी नही है| लेकिन इस स्वरूप के आत्मघाती हमले करने का तंत्र तालिबान ने अपनाया है| इस वजह से इस हमले में तालिबान का ही हाथ होने की आशंता जताई जा रही है| अफगान राष्ट्राध्यक्ष अश्रफ गनी और प्रमुख कार्यकारी अधिकारी डॉ.अब्दुल्ला अब्दुल्ला इन्होंने भी इस हमले के लिए तालिबान ही जिम्मेदार कहा है|

पिछले हफ्ते में ही अमरिका ने संयुक्त अरब अमिराती में तालिबान के कमांडर्स समेत चर्चा की थी| अफगानिस्तान के राजनीतिक प्रवाह में तालिबान शामिल हो, यह सुझाव भी अफगानिस्तान के लिए नियुक्त किए गए अमरिका के विशेष दूत झाल्मे खालिलझाद इन्होंने रखा था| इस पर तालिबान का जवाब क्या है, यह अब तक स्पष्ट नही हो सका है| लेकिन अगले कुछ दिनों में अमरिकी राष्ट्राध्यक्ष डोनाल्ड ट्रम्प ने अफगानिस्तान से सेना की वापसी करने का ऐलान किया| अमरिकी सेना की अबतक अफगानिस्तान से वापसी नही हुई है| इस पृष्ठभुमि पर राजधानी काबुल में अफगान सरकार के दफ्तर पर तालिबान का हमला तनाव में बढोतरी करने के लिए कारण बन सकता है|