सवर्णों के आर्थिक पिछडों को १० प्रतिशत आरक्षण – केंद्रीय कैबिनेट का निर्णय

नई दिल्ली – सवर्णों के पिछडों को सरकारी नौकरी और शिक्षा में १० प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय केंद्रीय कैबिनेट ने किया है| इसके लिए संविधान में जरूरी सुधार करने के लिए विधेयक मंगलवार के दिन संसद में रखने का तय किया गया है| फिल हाल आरक्षण के लिए ५० प्रतिशत कोटा सिमीत है और केंद्रीय कैबिनेट ने किए निर्णय के अनुसार इसमें सवर्णों के आर्थिक पिछडों को स्थान मिलना मुमकिन नही| इसीलिए आरक्षण में बढोतरी करने के लिए संविधान में सुधार करके यह प्रमाण ६० प्रतिशत तक बढाया जाएगा, यह जानकारी केंद्र सरकार के सूत्रों ने दी|

सोमवार के दिन केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय किया गया| पिछले कुछ महीनों से आरक्षण की मांग करने वाले समाजों के गुट आक्रामक हुए है| सरकार ने मांग मंजूर करने के बावजूद सर्वोच्च न्यायालय ने दिए निर्देश के नुसार आरक्षण का प्रमाण ५० प्रतिशत से अधिक करना सरकार को मुमकिन ना होने की बात स्पष्ट हुई थी| इस परिस्थिति में केंद्रीय कैबिनेट ने सवर्णों के आर्थिक पिछडों के लिए आरक्षण का लाभ देने का अहम निर्णय किया है|

इस निर्णय की जानकारी सामने आने के बाद कुछ लोगों ने इस निर्णय की वैधता पर सवाल किए थे| आरक्षण की मर्यादा ५० प्रतिशत है, ऐसे में इसमें १० प्रतिशत की बढोतरी कैसे करेंगे, यह सवाल पुछा जा रहा था| लेकिन इस संबंधी अधिक जानकारी देनेवाले समचार कुछ समय बाद प्रसिद्ध हुए|

इसके अनुसार केंद्र सरकार मंगलवार के दिन संसद में संविधान में सुधार करने के लिए विधेयक रखेगा| इस सुधार के द्वारा आरक्षण की मर्यादा ५० प्रतिशत से ६० प्रतिशत तक बढाई जाएगी| इस वजह से केंद्रीय कैबिनेट के निर्णय को संसद से मंजुरी प्राप्त होने के बाद यह विधेयक कानून में परावर्तित होगा| आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए भी इस विधेयक में प्रावधान किए जाएंगे, यह जानकारी केंद्र सरकार के सूत्रों ने दी है| इस निर्णय पर देश भर से संमिश्र प्रतिक्रिया प्राप्त हो रही है| कुछ लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया है, तो कुछ लोग आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए विरोध कर रहे है| वही, इसमें अन्य धर्मियों का भी समावेश करने की मांग हो रही है, लेकिन इस मुद्दे पर सरकारने अबतक प्रतिक्रिया नही दी है|

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